किताब : डिबिया (लघुकथा संग्रह)
लेखक : उदय प्रकाश
समकालीन हिंदी साहित्य में ऐसे लेखक बहुत कम हैं जिनकी रचनाओं को निश्चिंत होकर पढ़ा जा सके और यह विश्वास बना रहे कि वे केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि पाठक को कुछ नया सोचने और समझने का अवसर भी देंगी। उदय प्रकाश ऐसे ही विरले रचनाकारों में हैं। उनकी कहानियों के प्रति मेरे मन में हमेशा विशेष उत्सुकता रही है, और इसी उत्सुकता ने मुझे डिबिया पढ़ने के लिए प्रेरित किया।
बारह लघुकथाओं से सुसज्जित इस संग्रह को मैंने एक ही बैठक में पढ़ लिया, जो मेरे जैसे धीमी गति से पढ़ने वाले के लिए अपने आप में सुखद और रोमांचक अनुभव था। संग्रह की प्रत्येक कहानी के साथ महेश वर्मा द्वारा बनाए गए चित्र कथाओं के वातावरण को और अधिक जीवंत बना देते हैं। ऐसा लगता है मानो कहानी के पात्र आँखों के सामने साकार हो उठे हों।
इस संग्रह की कहानियाँ केवल सामाजिक और राजनीतिक विसंगतियों पर तीखा व्यंग्य ही नहीं करतीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से भरे ऐसे पात्र भी रचती हैं जो पाठक के मन पर गहरी छाप छोड़ जाते हैं। कई कहानियाँ पढ़ते-पढ़ते मन उदास हो उठता है और उनके भाव लंबे समय तक स्मृतियों में बने रहते हैं।
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