1950 के दशक का साहित्यिक आंदोलन)
मुख्य कालक्रम एवं उत्पत्ति
नई कविता छठे दशक (1951-1960) की प्रमुख साहित्यिक धारा है। इसके आरंभ को लेकर दो प्रमुख मत प्रचलित हैं:
1951 (दूसरा सप्तक):लक्ष्मीकांत वर्मा के अनुसार, अज्ञेय द्वारा संपादित 'दूसरा सप्तक' के प्रकाशन के साथ ही प्रयोगवाद का रूपांतरण 'नई कविता'में हो गया।
1954 (नई कविता पत्रिका): डॉ. जगदीश गुप्त द्वारा संपादित पत्रिका 'नई कविता' के प्रकाशन से इस आंदोलन को विधिवत पहचान मिली।
प्रमुख नामकरण एवं श्रेय
अज्ञेय: 1952 में सबसे पहले अपनी कविताओं को 'नई कविताएँ' कहकर संबोधित किया।
शमशेर बहादुर सिंह: इन्होंने भी इसी कालखंड में अपनी रचनाओं के लिए 'नई कविता' शब्द का प्रयोग किया।
महत्वपूर्ण वैचारिक टिप्पणी
"नई कविता को प्रयोगवाद से अलग नहीं किया जा सकता; अंतर केवल यह है कि प्रयोगवाद में 'प्रयोगशीलता' केंद्र में है, जबकि नई कविता में 'प्रयोग' एक केंद्रीय प्रवृत्ति के रूप में नहीं दिखता।" — शंभूनाथ सिंह
विशेषताएं
प्रयोगवाद का विकसित रूप: यह प्रयोगवाद की सीमाओं को विस्तार देती है।
लघु मानव की प्रतिष्ठा: सामान्य जन के जीवन और अनुभूतियों को प्रमुखता।
यथार्थवादी दृष्टि: जीवन के हर पक्ष (सुख-दुःख) का तटस्थ चित्रण।
--- आर. पी. शुक्ला
