Sunday, October 17, 2021

एक नीला आईना बेठोस / शमशेर बहादुर सिंह

 

 

एक नीला आईना

बेठोस-सी यह चाँदनी

और अंदर चल रहा हूँ मैं

उसी के महातल के मौन में ।

मौन में इतिहास का

कन किरन जीवित, एक, बस ।

एक पल की ओट में है कुल जहान ।

आत्मा है

अखिल की हठ-सी ।

चाँदनी में घुल गए हैं

बहुत-से तारे, बहुत कुछ

घुल गया हूँ मैं

बहुत कुछ अब ।

रह गया-सा एक सीधा बिंब

2 comments:

'दण्ड प्रहार' : सभ्यताओं के संघर्ष से उपजी एक नित्य कथा

पुस्तक : 'दण्ड प्रहार' : सभ्यताओं के संघर्ष से उपजी एक नित्य कथा  (उपन्यास) लेखक : भगवानदास मोरवाल भगवानदास मोरवाल का उपन्यास दण्ड प...