Thursday, October 28, 2021

ऐसा कोई घर आपने देखा है / अज्ञेय


कौन खोले द्वार

सचमुच के आये को
कौन खोले द्वार!
हाथ अवश
नैन मुँदे
हिये दिये
पाँवड़े पसार!
कौन खोले द्वार!
तुम्हीं लो सहास खोल
तुम्हारे दो अनबोल बोल
गूँज उठे थर थर अन्तर में
सहमे साँस
लुटे सब, घाट-बाट,
देह-गेह
चौखटे-किवार!
मीरा सौ बार बिकी है
गिरधर! बेमोल!
सचमुच के आये को
कौन खोले द्वार!




No comments:

Post a Comment

'संगत: विश्वनाथ त्रिपाठी' —वेद प्रकाश साक्षात्कार (Interview)

  'संगत: विश्वनाथ त्रिपाठी' —वेद प्रकाश पुस्तक मूलतः साक्षात्कार (Interview) विधा की पुस्तक है।इस पुस्तक में वरिष्ठ साहित्यकार एवं आ...